08 February 2012

'तुम्हें खबर तो होगी'






तुम्हें खबर तो होगी,
परेशां नहीं हूँ अब
सकते में था कुछ देर,
 हैरां नहीं हूँ अब

तुम गये तो लगा, 
सब कुछ उजड़ गया
तमन्नाएँ पालने का 
जज़्बा ही मर गया
कुछ दिन न हुआ होश 
मुझे सुबह शाम का
न किसी के वास्ते रहा 
न अपने काम का
गुजरते वक़्त ने लेकिन 
बदल दिया है सब
खाली थी ज़िन्दगी मगर 
वीरां नहीं हूँ अब

तुम्हें खबर तो होगी, 
परेशां नहीं हूँ अब


यूं तो ज़िंदगी से 
ज्यादा न पाया था
हर हसीन लम्हे को 
पल में गंवाया था
हमारे अफ़साने में कुछ 
 दास्ताँ सी बात है 
दिल के सेहरा में हरे 
 दरख़्त सी इक याद है 
साये में जिसके हंस के 
गुज़ारूंगा उम्र अब
यादों को कहीं कोई, 
छीन पाया भला कब

तुम्हें खबर तो होगी, 
परेशां नहीं हूँ अब
सकते में था कुछ देर,
 हैरां नहीं हूँ अब 


- योगेश शर्मा


9 टिप्पणियाँ:

neelima garg ने कहा…

interesting....

सदा ने कहा…

वाह ...बहुत खूब ।

vidya ने कहा…

very good...
बहुत अच्छी कविता...
soft and strong..

Satyendra ने कहा…

hamen bhi khabar hai aaj propose day hai...padhkar maja aa gaya kasam se

***Punam*** ने कहा…

खाली थी ज़िन्दगी मगर
वीरां नहीं हूँ अब

तुम्हें खबर तो होगी,
परेशां नहीं हूँ अब

bas itna hi kafi hai.....

दिलबाग विर्क ने कहा…

आपकी पोस्ट चर्चा मंच 9/2/2012 पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
http://charchamanch.blogspot.com
चर्चा मंच-784:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

रश्मि ने कहा…

खाली थी ज़िन्दगी मगर
वीरां नहीं हूँ अब....खूब।

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत खूब!

Reena Maurya ने कहा…

बहुत ही सुन्दर अनुपम भाव संयोजन...